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विधानसभा में करुणामूलकों की आवाज बने आरएस बाली, बोले- सरकार इन परिवारों की संरक्षक बनकर करे मदद

आरएस बाली ने करुणामूलक आश्रितों के लिए सरकार से एमटीडब्ल्यू पॉलिसी जल्द बनाने की मांग की
150 करुणामूलक मामलों में 45 वर्ष से अधिक आयु वालों को वन टाइम राहत देने की अपील
आय सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर 3 लाख करने से नियुक्तियों की संख्या करीब 400 से बढ़कर 1200 तक पहुंची


शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे परिवारों का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से उठा। कांग्रेस विधायक आरएस बाली ने सदन में इस वर्ग की पीड़ा को सामने रखते हुए अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री से करुणामूलक नियुक्तियों की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने अपने घर के कमाने वाले सदस्य या माता-पिता में से किसी एक अथवा दोनों को खोया है। परिवार के मुखिया के चले जाने के बाद इन बच्चों और आश्रितों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है और सरकारी नौकरी उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि परिवार को संभालने का एक बड़ा सहारा होती है।

आरएस बाली ने कहा कि करुणामूलक आधार पर नौकरी मांगने वाले परिवार समाज के सबसे अधिक वंचित वर्गों में शामिल हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि ऐसे परिवार वर्षों से नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ इस विषय पर कई बार व्यक्तिगत स्तर पर चर्चा हुई है और सरकार ने भी इस संवेदनशील मुद्दे को समझते हुए पात्रता मानदंड में बदलाव किया है।

आय सीमा बढ़ने से करीब 400 से 1200 तक पहुंची नियुक्तियों की संभावना

आरएस बाली ने सदन में बताया कि पिछली सरकारों के दौरान करुणामूलक नियुक्तियों के लिए जो पात्रता मानदंड निर्धारित था, उसमें बहुत कम आवेदक पात्र हो पाते थे। बड़ी संख्या में आवेदन होने के बावजूद पात्रता की शर्तों के कारण नियुक्तियों की संख्या सीमित रह जाती थी। उनके अनुसार उस समय करीब 400 मामले ही नियुक्ति की प्रक्रिया तक पहुंच पा रहे थे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के बाद सरकार ने परिवार की वार्षिक आय की सीमा में राहत देने का निर्णय लिया। पहले 2.50 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया गया। इसका सीधा असर करुणामूलक नियुक्तियों की संख्या पर पड़ा और करीब 400 मामलों से बढ़कर लगभग 1200 मामलों तक नियुक्ति की संभावना पहुंची।

विधायक ने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या में उन परिवारों को उम्मीद मिली, जो लंबे समय से सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों की प्रक्रिया भी रिकॉर्ड समय में आगे बढ़ाई गई और क्लास-3 श्रेणी में भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।

क्लास-3 में करीब 150 को नौकरी, क्लास-4 की प्रक्रिया एमटीडब्ल्यू पॉलिसी के इंतजार में

आरएस बाली ने बताया कि करुणामूलक आधार पर क्लास-3 की नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और करीब 150 लोगों को अब तक नौकरी दी जा चुकी है। इनमें क्लर्क और जूनियर ऑफिस असिस्टेंट जैसे पद शामिल हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि क्लास-4 के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हो पाई है, क्योंकि मल्टी टास्क वर्कर यानी एमटीडब्ल्यू से संबंधित नीति अभी तक राज्य में तैयार नहीं हुई है।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि एमटीडब्ल्यू पॉलिसी जल्द से जल्द तैयार की जाए, ताकि क्लास-4 श्रेणी में भी करुणामूलक आधार पर नौकरी के पात्र आवेदकों को नियुक्ति मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने माता-पिता या घर के कमाने वाले सदस्य को खोया है, उनके लिए नौकरी मिलने में देरी का मतलब आर्थिक परेशानियों का और लंबा खिंचना है।

पुराने रिजेक्टेड मामलों को दोबारा खोलने की पहल, लेकिन आय सीमा पर उठाया सवाल

आरएस बाली ने सदन में 1 जुलाई 2026 की अधिसूचना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने और रिजेक्ट हो चुके करुणामूलक मामलों को दोबारा आवेदन का अवसर देने की पहल की है। इसके तहत ऐसे लोगों को फिर से प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया गया, जिनके मामले पिछली सरकारों के दौरान किसी पात्रता मानदंड के कारण खारिज हो गए थे।

उन्होंने बताया कि इन मामलों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। हालांकि, उन्होंने इस प्रक्रिया में एक तकनीकी समस्या की ओर सरकार का ध्यान खींचा।

उनका कहना था कि नए मामलों में सरकार ने परिवार की आय सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग पात्र हुए। लेकिन पुराने मामलों को दोबारा खोलते समय फिर से पुराना आय मानदंड लागू किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें 75 हजार रुपये प्रति सदस्य के आधार पर आय सीमा का प्रावधान सामने आता है। ऐसे में कई पुराने आवेदक, जो पहले किसी वजह से नौकरी से वंचित रह गए थे, दोबारा भी पात्रता के दायरे से बाहर हो सकते हैं।

बाली बोले- जब नए मामलों में राहत दी तो पुराने आवेदकों को भी मिले न्याय

आरएस बाली ने सरकार से इस विसंगति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब नए मामलों के लिए आय सीमा 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की गई है और इससे पात्र लोगों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है, तो पुराने मामलों को दोबारा खोलते समय अलग और अधिक कठिन आय मानदंड रखना उचित नहीं लगता।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पुराने रिजेक्टेड करुणामूलक मामलों पर भी मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जाए, ताकि लंबे समय से नौकरी का इंतजार कर रहे परिवारों को दोबारा अवसर मिल सके।

विधायक ने कहा कि करुणामूलक आधार पर नौकरी पाने वाले बच्चे सामान्य रोजगार की दौड़ में शामिल अभ्यर्थियों से अलग परिस्थिति में होते हैं। उनके परिवार में किसी कमाने वाले सदस्य की मृत्यु के कारण आर्थिक संकट पैदा हुआ होता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि इन परिवारों की परिस्थितियों को समझना भी है।

45 वर्ष से अधिक उम्र के 150 मामलों के लिए वन टाइम राहत की मांग

अपने संबोधन के दौरान आरएस बाली ने एक और महत्वपूर्ण मांग उठाई। उन्होंने बताया कि करीब 150 ऐसे करुणामूलक मामले हैं, जिनमें आवेदक 45 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन मामलों में वन टाइम रिलैक्सेशन दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि इनमें से कुछ आवेदक पहले निर्धारित पात्रता मानदंड के दायरे में आते थे, लेकिन प्रक्रिया लंबी चलने के कारण अब आयु सीमा पार कर चुके हैं, तो उन्हें केवल तकनीकी आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन के माध्यम से सरकार तक यह संदेश पहुंचाया जाए कि इन 150 परिवारों के मामलों पर विशेष रूप से विचार किया जाए। उनका कहना था कि इन परिवारों ने पहले ही अपने माता-पिता या परिवार के बड़े सदस्य को खोया है और अब वर्षों की प्रतीक्षा के बाद उम्र सीमा उनके रास्ते में बाधा बन रही है।

‘सरकार इन परिवारों की संरक्षक बनकर करे मदद’

आरएस बाली ने अपने संबोधन में करुणामूलक परिवारों की स्थिति को भावनात्मक रूप से सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार का बड़ा सदस्य नहीं रहता तो उस परिवार को होने वाली आर्थिक और सामाजिक परेशानी को समझना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के लिए सरकार और विधानसभा को संरक्षक की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर इस वर्ग के हित में ऐसा रास्ता निकालेंगे, जिससे पात्र लोगों को जल्द रोजगार मिल सके।

आरएस बाली ने सरकार से मुख्य रूप से तीन स्तरों पर कदम उठाने की मांग रखी। पहला, क्लास-4 नियुक्तियों के लिए एमटीडब्ल्यू पॉलिसी जल्द तैयार की जाए। दूसरा, पुराने रिजेक्टेड मामलों को दोबारा खोलते समय आय सीमा के मानदंड पर पुनर्विचार किया जाए। तीसरा, 45 वर्ष से अधिक आयु वाले करीब 150 मामलों के लिए वन टाइम आयु सीमा में राहत देने पर सरकार गंभीरता से विचार करे।

उन्होंने कहा कि करुणामूलक नियुक्ति केवल एक सरकारी नौकरी का विषय नहीं है, बल्कि उन परिवारों के भविष्य से जुड़ा मामला है, जिनके घर का सहारा समय से पहले उनसे छिन गया। ऐसे परिवारों को लंबे समय तक सरकारी प्रक्रिया में उलझाए रखने के बजाय संवेदनशील और व्यावहारिक नीति के जरिए राहत देना जरूरी है।